कांगड़ा: पैराग्लाइडर रोहित भदौरिया का ही निकला जालसू जोत पर मिला नर कंकाल

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बीड़ से उड़ाने भरने के बाद लापता पैराग्लाइडर का शव 5 महीने बाद मिला

Paragliding in Himachal: टीम को रोहित का कुछ सामान 12 अप्रैल को जालसू के समीप संकरी पहाड़ी में मिला था, उस समय वहां बर्फ अधिक होने के चलते सर्च अभियान नहीं चलाया जा सका था. घटना के करीब 4 माह बाद जब रेस्क्यू टीम दोबारा पहुंची तो उसका शव बरामद हुआ.

कांंगड़ा. बिलिंग घाटी से जनवरी में लापता हुए पैराग्लाइडिंग पायलट (Paragliding Pilot) का शव को कड़ी मशक्कत के बाद बैजनाथ के सरकारी अस्पताल में पहुंचा दिया गया है. शव लापता पायलट का ही है इसकी भी पुष्टि कांगड़ा (Kangra) के पुलिस अधीक्षक विमुक्त रंजन ने कर दी है. प्राप्त जानकारी के अनुसार इस शव को लाने के लिए पुलिस के दो जवान हेड कांस्टेबल पवन कुमार, गुरबचन सिंह और मृतक के कुछ मित्र और  बीड़ से रेस्क्यू दल के लोग गए हुए थे. जोकि नर कंकाल में तब्दील हो चुके पायलट को लेकर बैजनाथ पहुंच गये हैं.

पायलट का शरीर बुरी तरह से सड़ गल चुका था जो कि हर कंकाल में तब्दील हो चुका था. जिसके चलते उसे महज़ एक बैग में ही लाया जा सका है.  शव के साथ मृतक पायलट का ग्लाइडर और अन्य सामान भी मिला है, जिससे लगभग यह तय है कि ये नर कंकाल रोहित भदौरिया पायलट का ही है.

जानकारी के अनुसार मृतक के भाई ने मृतक के कपड़ों से शव की पुष्टि की थी. नरकंकाल का अब पोस्टमार्टम करवाकर उनके परिजनों के सपुर्द करवा दिया जायेगा. काबिलेगौर है कि करीब पांच महीने पहले 8 जनवरी को रोहित भदोरिया ने बिलिंग से उड़ान भरी थी और शाम को वापस नहीं आ पाए थे.

9 जनवरी को ही उनके परिजनों ने व्यापक स्तर पर छानबीन अभियान चलाया था और 9 जनवरी को ही हेलीकॉप्टर से भी उनकी तलाश करने की कोशिश की गई थी. मगर पहाड़ी क्षेत्र में  होने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो पाया था और उन दिनों  बर्फबारी भारी हो जाने के कारण रोहित भदोरिया से रेस्क्यू टीम का संपर्क नहीं हो पाया था.हंसमुख और मिलनसार रोहित काफी समय से बीड़ में रह रहे थे और उनकी तलाश के लिए लगभग  तीन से चार बार परिजनों द्वारा प्रशासन के सहयोग से अभियान चलाया गया. मगर उनका कोई अता पता नहीं चल पा रहा था. तीन-चार दिन पहले ही एक युवक ने जाली दरवे के पास पैराग्लाइडर और कुछ सामान और एक शव होने की सूचना बीड पुलिस चौकी में दी थी.  जिसके बाद रेस्क्यू टीम फिर से खोज के लिए रवाना हुआ था और आज दल सामान और रोहित भदौरिया का नरकंकाल लेकर बैजनाथ पहुंच गये हैं.









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