ऑल इंडिया 15 रैंक लेकर गुरकीरत ट्राईसिटी में फर्स्ट, नवजोत सेकेंड और मारिया तीसरे नंबर पर

0
1


चंडीगढ़4 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

(गौरव भाटिया) मेडिकल की फील्ड में अपना करियर बनाने के इच्छुक स्टूडेंट्स के लिए शुक्रवार शाम को नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) का रिजल्ट घाेषित हुआ। भास्कर ने रिजल्ट से पहले ही बता दिया था कि ट्राईसिटी के टॉपर कौन रहेंगे। भास्कर ने शहर के जो टाॅप-8 स्टूडेंट्स बताए थे, रिजल्ट में भी वही टॉपर रहे।

सेंट पीटर्स स्कूल सेक्टर-37 से 12वीं कर चुके गुरकीरत सिंह ने 710 नंबर लेते हुए ऑल इंडिया रैंक 15 हासिल किया और वे ट्राईसिटी में फर्स्ट पोजिशन पर रहे। ब्रिटिश स्कूल मोहाली के नवजोत सिंह ने 691 नंबर लेते हुए ऑल इंडिया 221 रैंक लिया और वे ट्राईसिटी में सेकेंड पोजिशन पर रहे। सेंट पीटर्स स्कूल सेक्टर-37 की मारिया मैथ्यू ने 690 नंबर लेते हुए ऑल इंडिया 254 रैंक लिया और वे ट्राईसिटी में तीसरे नंबर पर रहीं।

नॉलेज एक समान नंबर आ जाएं तो बायोलॉजी, केमिस्ट्री के नंबर देखते हैं

इन टॉपर्स के नंबर एक समान हैं, लेकिन रैंकिंग में फर्क है। जब स्टूडेंट्स के नंबर एक समान आते हैं तो सबसे पहले बॉयोलॉजी में नंबर देखे जाते हैं। अगर ये भी एक समान हों तो फिर देखा जाता है कि केमिस्ट्री में कितने नंबर आए हैं। यदि इसके भी नंबर समान हों तो फिर उम्र देखी जाती है। ज्यादा उम्र वाले को ऊपर रखा जाता है।

पंजाब-हरियाणा के स्टूडेंट्स के जो नंबर भास्कर ने बताए थे, उतने रिजल्ट में आ. नाभा की ईशिता 706 नंबर लेकर पंजाब में नंबर-1 ऑल इंडिया रैंक 24

पंजाब के संगरूर से कार्तिक के 705 नंबर रहे और ऑल इंडिया 47 रैंक लिया। लुधियाना की आयुषि गुप्ता ने 695 नंबर लिए और ऑल इंडिया 140 रैंक रहा।

जालंधर की अदिति महाजन ने 690 नंबर लिए और ऑल इंडिया 291

अंबाला की खुशी जिंदल ने 687 मार्क्स लिए और ऑल इंडिया 340 रैंक रहा। हरियाणा के अभेदय ने 686 मार्क्स लिए। ऑल इंडिया 354 रैंक रहा।

रिजल्ट घोषित होते ही साइट हुई क्रैश, रात 9 बजे स्टूडेंट्स देख पाए नंबर

तीन साल पहले शुरू हो जाती है ‘चीते’ की तलाश…
जो भी टॉपर्स होते हैं, उनके टॉपर बनने का सफर तीन साल पहले तब शुरू हो जाता है, जब वे 10वीं क्लास में होते हैं। इन टॉपर्स को आमतौर पर कोचिंग इंस्टीट्यूट्स की भाष में ‘चीता’ भी कहा जाता है। कई बार कोचिंग इंस्टीट्यूट स्कूल से पता करते हैं कि होशियार स्टूडेंट कौन है।

लेकिन कई बार होशियार स्टूडेंट खुद कोचिंग इंस्टीट्यूट को अप्रोच करता है कि क्योंकि उसे नेशनल टैलेंट सर्च एग्जामिनेशन (एनटीएसई) को क्रैक करना होता है। जब कोचिंग इंस्टीट्यूट एनटीएसई की तैयारी करवाते हैं तो एक साल के अंदर कई बार टेस्ट लिए जाते हैं।

इन टेस्ट के रिजल्ट के आधार पर स्टूडेंट के लेवल का पता लगता है। इसके बाद जब ये स्टूडेंट 11वीं में जाते हैं तो यह विभिन्न तरह की ओलंपियाड देते हैं जैसे साइंस, मैथ्स और फिजिक्स ओलंपियाड। खासबात यह है कि जो टाॅपर्स निकलते हैं, उन्होंने हमेशा एनटीएसई और ओलंपियाड को क्रैक किया होता है।

12वीं तक पहुंचते-पहुंचते इन ‘चीतों’ को पूरी फोक्स्ड ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि ये बाकी सभी से आगे निकल जाएं। जब यह कंपीटिटिव एग्जाम में बाजी मारते हैं तो कोचिंग इंस्टीट्यूट के उन टीचर्स की तीन साल की मेहनत सफल हो जाती है। इनकी पब्लिसिटी से से इंस्पायर होकर फिर अन्य स्टूडेंट्स कोचिंग जॉइन करते हैं और इस तरह स्टूडेंट्स में से ‘चीतों’ को तराशने और उन्हें एग्जाम की रेस में फर्स्ट लाने का काम शुरू हो जाता है।



Source link

Advertisement

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here