आर्टिकल 370 पर बोले उमर अब्दुल्ला- कोई सरकार हमेशा नहीं रहेगी, हम इंतजार करेंगे

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श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) से अनुच्छेद 370 (Article 370) को हटाए जाने के बाद हिरासत में लिए गए राज्य के प्रमुख नेताओं की अब रिहाई हो चुकी है. इन नेताओं में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती शामिल हैं. महबूबा मुफ्ती की रिहाई बीते मंगलवार को 14 महीने बाद हुई है. गुरुवार को फारूक अब्दुल्ला के घर पर इन नेताओं ने बैठक की, जिसपर गुपकार समझौते (Gupkar Declaration) पर चर्चा हुई. वहीं, 221 दिनों तक नजरबंद रहने के बाद उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने पहली बार इंटरव्यू दिया है. इसमें अब्दुल्ला ने कहा- ‘आर्टिकल 370 के लिए संघर्ष जारी रहेगा. हमारी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में है. कोई भी सरकार हमेशा के लिए नहीं रहती. हम इंतजार करेंगे. हार नहीं मानेंगे.’

उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने ‘इंडिया टुडे’ को दिए गए इंटरव्यू में ये बातें कही हैं. उन्होंने कहा, ‘हम अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं. आर्टिकल 370 (Article 370) के खिलाफ पहले भी आवाज उठाई थी और आज भी उठा रहे हैं. केंद्र का फैसला राज्य के लोगों के हित में नहीं है.’ उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘गुपकार समूह की बैठक 4 अगस्त 2019 को शुरू हुआ एक सिलसिला है. आज हम इसे एक उचित नाम, औपचारिक संरचना और एक वाजिब एजेंडा देने के लिए मिले हैं. यह अवसरवादी गठबंधन नहीं है. लेकिन ये राजनीतिक है. इसे आप सामाजिक गठबंधन नहीं कह सकते.’

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गैरकानूनी रूप से हमसे बहुत कुछ छीना गयाउमर अब्दुल्ला आर्टिकल 370 को खत्म करने को एक बार फिर असंवैधानिक करार दिया है. उन्होंने कहा, ‘असंवैधानिक और गैरकानूनी रूप से हमसे जो छीन लिया गया था, उसे वापस पाने का यह एक संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीका है.’ वहीं, चीन के जम्मू-कश्मीर के आंतरिक मामलों पर कमेंट करने पर उमर अब्दुल्ला ने तंज भरे लहजे में कहा कि क्या ये आर्टिकल 370 चीन की मदद से वापस आ जाएगा? ये तो बीजेपी प्रवक्ता का फॉर्मूला है.’

क्या है गुपकार समझौता?
4 अगस्त 2019 को फारूक अब्दुल्ला के गुपकार स्थित आवास पर एक सर्वदलीय बैठक हुई थी. यहां एक प्रस्ताव जारी किया गया था, जिसे गुपकार समझौता कहा गया. इसके अनुसार पार्टियों ने निर्णय किया कि वे जम्मू-कश्मीर की पहचान, स्वायत्तता और उसके विशेष दर्जे को बनाए रखने के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करेंगे.

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गुपकार समझौते के तहत कहा गया था, ‘जम्मू-कश्मीर की पहचान, स्वायत्तता और विशेष दर्जे की रक्षा और बचाव के लिए हम सभी नेता प्रतिबद्ध हैं. राज्य का बंटवारा कश्मीर और लद्दाख के लोगों के खिलाफ जुल्म है. आर्टिकल 370 समाप्त करने के फैसले असंवैधानिक है.’ इस समझौते में जम्मू-कश्मीर के छह बड़े राजनीतिक दल शामिल हैं. इनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, कांग्रेस समेत तीन और दल हैं.

बता दें कि गुपकार समझौते के अगले ही दिन 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटा दिया गया था. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया.





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