आरोपी ढूंढ़ने के बजाय शिकायत ही बंद कर दी: ​​​​​​​दड़वा के युवक से ठगे थे 72 हजार रुपए, पीड़ित ने SSP को दी शिकायत, केस री-ओपन की मांग

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चंडीगढ़7 घंटे पहले

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इस मामले में IO अनूप सिंह ने कहा कि ऐसा नहीं कि अपने आप शिकायत बंद की है बकायदा पीड़ित से कंसेंट ली होगी।

दड़वा के तरसेम से अक्तूबर 2019 में ठगों ने स्कीम में कार निकलने का लालच देकर 85 हजार रुपए ठगे थे। तरसेम ने इसे लेकर साइबर सेल में शिकायत दी। पीड़ित ने इस उम्मीद के साथ शिकायत दी थी कि साइबर सेल उसकी मदद करेगी, लेकिन पुलिस ने जांच किए बिना ही शिकायत क्लोज कर दी। इसको लेकर अब पीड़ित ने SSP को शिकायत दी है और केस री-ओपन करने की मांग की है।

यह है मामला

तरसेम ने बताया कि अक्तूबर 2019 में उसे कॉल आई। कॉलर ने कहा कि स्नैपडील की तरफ से बोल रहा है। उसने कहा कि आपने लक्की ड्राॅ में एक गाड़ी जीती है। कॉल करने वाले ने उसे दो मोबाइल नंबर नीतिन कुमार और कृष्ण सरकार के देते हुए कहा कि वेस्ट बंगाल में उनके प्राइज डिपार्टमेंट के एसोसिएटस हैं और उनके द्वारा जीती कार की सारी डिटेल ये बताएंगे।

उसने इन नंबर पर कॉल की तो बताया गया कि वेस्ट बंगाल से गाड़ी चंडीगढ़ भेजने के लिए रजिस्ट्रेशन फीस व अन्य कई प्रकार की औपचारिकताएं हैं, जो पूरी करनी होगी। ठगों ने रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर उनसे 85 हजार अकाउंट में ट्रांसफर करवाने को कहा। आरोपियों ने एक ड्राइवर जिसने गाड़ी वेस्ट बंगाल से चंडीगढ़ लेकर आना था, उसकी फोटो और मोबाइल नंबर भी शेयर किया। तरसेम ने ड्राइवर से भी फोन पर बात कर ली। लेकिन पैसे ट्रांसफर हो जाने के बाद वह मोबाइल नंबर स्विच ऑफ आने लगे। समझ आया कि उसके साथ ठगी हो गई है।

फर्जी फोटो दिखाया, कहा- यह आरोपी है इसे जल्द पकड़ेंगे

पीड़ित ने बताया कि एक दिन वह केस का स्टेटस पता करने के लिए साइबर सेल पहुंचा। वह हेड काॅन्स्टेबल अनूप सिंह से मिला और ठगी की पूरी कहानी बताई। IO ने उसे वापस भेज दिया और कहा कि जल्द आरोपियों को पकड़ लेंगे। कुछ महीने बाद दोबारा वह सेल गया तो IO ने अपने मोबाइल पर उसको एक अज्ञात युवक की फोटो दिखाते हुए कहा कि यह वह इंसान है जिसने उसके साथ ठगी की है और यह वेस्ट बंगाल का है।

दो चार दिन में आरोपी को पकड़ लेंगे। तरसेम ने बताया कि उसको भरोसा हो गया कि उसके पैसे वापस मिल जाएंगे और ठग भी पकड़े जाएंगे। उसी समय IO ने उसे बातों में लेते हुए पेपर पर यह कहते हुए साइन करवा लिए कि अब फाइल ऊपर अफसरों तक जानी है और उसका केस सॉल्व होने जा रहा है। तरसेम ने विश्वास कर साइन कर दिए। एक महीने बाद जब वह फिर सेल गया तो उसे जवाब मिला कि आपकी शिकायत तो बंद कर दी गई है।

वहीं इस मामले में IO अनूप सिंह ने कहा कि ऐसा नहीं कि अपने आप शिकायत बंद की है बाकायदा पीड़ित से कंसेंट ली होगी। क्योंकि साइबर ठगी केसेज में जाली सिम होती है जो कि वेस्ट बंगाल की थी और जिस अकाउंट में पैसे ट्रांसफर हुए वह भी जाली कागजात पर ऑनलाइन खोला गया था। IO कभी अपनी मर्जी से कम्प्लेंट बंद नहीं कर सकता। तरसेम को सारी बात बताकर उसके साइन लेने के बाद फाइल बंद की होगी।

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